Swami Vivekananda ki Prerak Kahaniya

swami vivekananda ki prerak kahaniya
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स्वामी विवेकानंद एक सन्यासी और बेदांत के बिख्यात और प्रभावशाली गुरु थे। स्वामी विवेकानद के बारे में हमारें ब्लोग में एक पोस्ट पहले भि लिखि गयी हैं, आप उस पोस्ट को पढ कर उनके बारे में बिस्तार में जानकारी ले सकते हैं। इस पोस्ट में आप को स्वामी विवेकानंद की प्रेरक कहानियां (Swami Vivekananda ki Prerak Kahaniya) और उनके जीवन से जुडी सच्ची घटनाए के बारें मे जानकारी मिलेगी।

Vivekananda Ki Prerak Kahaniya[एक अद्भुत कहानी]

सत्य को हजार तरीके से बताया जा सकता हैं, फिर भी हर सत्य ही होगा। — स्वामी विवेकानंद

swami vivekanand ki prerak prasang

Story – 1. लक्ष्य पर ध्यान

स्वामी विवेकानंद की प्रेरक कहानियां (Swami Vivekananda ki Prerak Kahaniya) -1.

एक बार स्वामी बिवेकानंद अपने आश्रम में सो रहे थे। तभि वहा एक ब्याक्ति आया और हाथ जोड कर उन्हे प्रणाम किया। फिर उस ने कहा ” स्वामी जी में बहुत दिनो से परेशान हु, मे अपने काम को बहुत हि मन लगा कर करता आया हु और करता भि हु। तब भि मुझे अभि तक सफलता नहि मिलि। मन लगा कर काम करने के बाबजुद भि मुझे सफलता क्यु नहीं मिल रहि कृपया मुझे मर्गदर्शन करें”।

उस ब्याक्ति कि यह बात सुन कर स्वामी बिबेकानंद मुस्कुराए और बोले – “तुम चिंता मत करो, एक काम करो थोडि देर मेरे कुत्ते को बाहर घुमा कर ले आओ तब तक में तुम्हारे समस्या का समाधान ढुडता हु”।

उनकि बात मान कर वो उनके कुत्ते को घुमा कर कुछ देर बात वापस आता हैं। उस को देख कर स्वामी उसे कहते हैं कि – ” यह कुत्ता इतना क्यो हॉफ रहा हैं और तुम थोडे से भि थके हुए नहीं लग रहे, ऐसा क्या हुआ”।

उस ने नम्र हो कर जवाफ दिया प्रभु में अपने रास्ते सिधा चल रहा था और यह कुत्ता इधर उधर भागे जा रहा था, उछल रहा था। जो कुछ भि देखता था वहि भाग कर चला जाता था, यहि कारण हैं यह इतना थक कर हॉफ रहा हैं।

इस पर स्वामी बिबेकानंद ने मुस्कुराकर कहॉ कि यहि तुम्हारे प्रश्न का जवाफ हैं। तुम्हारे सामने मंजिल हो कर भि इधर उधर भगते हो, जब अपने सफला के रास्ते से नहीं भटकोगे तब सफलता तुम आसानी से हासिल कर सकते हो। सफल होना हैं तो इधर उधर कि ध्याने हटा कर सारी मन कि शक्ति को केंद्रित कर के अपने लक्ष्य पर लगा देना चाहिए। तब हि हम बहुत जल्द सफल हो सकते हैं।

निष्कर्ष और इस कहॉंनी से शिक्षा :

इस कहॉंनी से हमे यह सिकने को मिलती हैं कि, हम सफलता को पाने के लिए इधर उधर भागते रहते हैं। जब कि मंजील हमारे सामने होते हुए भि उसे पहिचान नहि पाते। इस लिए जो हमारे लिए ज्रुरी नहीं हैं वहा से अपने ध्यान को हटा कर, जो हमारे लिए जरुरी हैं सारा ध्यान उसे पर लगा देना चाहिए। तब हि अपने लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं।

Story 2. Swami Vivekananda Ki Prerak Kahaniya

स्वामी विवेकानंद की प्रेरक कहानियां (Swami Vivekananda ki Prerak Kahaniya) -2

swami vivekanand ki prerak prasang

बिबेकानंद को देश बिदेश मे जानते हैं, एक बार कि बात हैं। बिदेश मे बिबेकानंद एक समारोह पर स्पीच दे रहे थे। स्पीच सुन कर एक बिदेशि महिला प्रसन्न हुयी। और आ कर स्वामी बिबेकानंद को बोलने लगी कि आप मुझ से शादी कर लिजिए, क्यो कि अगर आप मुझ से शादि करते है तो मुझे आप जैसे सकारात्मक सोच वाले पुत्र कि प्राप्ति होगी।

स्वामी बिबेकानंद उस कि ए बात सुन कर बोले, माफ करना मै एक सन्यासी हु, आप से शादी नहीं कर सकता। वल्कि ऐसा कर लिजिए मुझे हि पुत्र मान लिजिए, इस से ना तो मेरा सन्यासि का धर्म टुटेगा और आप को मुझ जैसा पुत्र भि मिल जाएगा।

उनकि यह बात सुन कर वो महिला उनके शरण मे गिर कर बोलि, आप महान हैं, आप अपने धर्म को इतनी महानता से मानते हैं।

निष्कर्ष और इस कहाँनी से सिख :

इस से हमे यह सिख सकते है कि चाहे जो कुच भि हो जाये हमे अपने लक्ष्य से भटकना नहीं चाहिये। और निरंतर बिना किसि स्वार्थ से कर्म करते रहना चाहिए। जिस से हम जीवन मे जरुर सफल हो सकते हैं।

Swami Vivekananda inspirational story in Hindi | निष्कर्ष

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स्वामी विवेकानंद की प्रेरक कहानियां (Swami Vivekananda ki Prerak Kahaniya) पढ कर आपको

विवेकनंद के जीवन कहाँनी से बहुत कुछ सिकने को मिला होगा। आप उनके बारे में क्या जानते हैं,

जो इस पोस्ट पर उल्लेख नहीं किया गया, कृपया कमेंट कर के जरुर बताए। जिसे हम इस पोस्ट जरुर पर अपडेट करेंगे।

आपको स्वामी विवेकानंद की प्रेरक कहानियां (swami vivekananda real story) पसंद आए तो अपने दोस्तो के

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